शुभ मंगल हो

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॥ पावन पाठ ॥

शुभ मंगल हो, शुभ मंगल हो ।

धरती का कण कण मंगल हो ।।

यहा मंगल हो वहा मंगल हो ।

सर्वत्र ही मंगल मंगल हो ।।

जल मंगल हो थल मंगल हो।

धरती का कण-मंगल हो।।

दिन मंगल हो निशि मंगल हो ।

जीवन का हर क्षण मंगल हो ।।

तन मंगल हो मन मंगल हो।

जन जन की वाणी मंगल हो।।

मति मंगल हो गति मंगल हो ।

हम सबका चिंतन मंगल हो ।।

शुभ मंगल हो, शुभ मंगल हो।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।