साँवरिया मैं तो घर बार छोड ही जाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ईयै रे काया में आना नंही जाना ।

नंही कोई धुम मचाना ॥

साँवरिया मैं तो घर बार छोड ही जाना......

ईयै रे काया में जीणा नही मरणा ।

नंही कोई भेद बताना ॥

साँवरिया मैं तो घर बार छोड ही जाना......

ईयै रे काया में झुठा लोग बसता।

झुठो नेसंग नांय बसाणा ॥

साँवरिया मैं तो घर बार छोड ही जाना......

ईयै रे काया में रोगी है घणेरा ।

रोगीडो रे साथ नहीं रहाणा ॥

साँवरिया मैं तो घर बार छोड ही जाना......

कहत मदन सुणो मेरे भाई।

हरि से ना हैत हटाणा ॥

साँवरिया मैं तो घर बार छोड ही जाना......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।