वर दे वर दे दाती

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

वर दे, वर दे, दाती वर दे, वर दे ll

खुशियों का वर दे माता l

तूँ किरपा कर दे माता l

तेरे दर ते खड़े सवाली,

तूँ झोली भरदे माता,,,

वर दे, वर दे, दाती वर दे, वर दे ll

तूँ वर दे अम्बे रानी,

मैं हर पल तुम्हें धिआऊँ l

तेरे नाम से ही मैं जागूँ,

तेरे नाम से ही सौं जाऊँ l

तेरा नाम प्यारा माता l

हर इक्क का सहारा माता l

माँ भव से पार लगा दे,

तेरा एक इशारा माता,,,

वर दे, वर दे, दाती वर दे, वर दे ll

आशा की ज्योत जगा के,

हम बैठे तेरे द्वारे l

हम को भी तारो दाती,

तूने लाखों पापी तारे l

तेरे दर पे सवाली माता l

जाएं ना ख़ाली माता l

हम फ़ूल तेरी बगिया के,

और तुम है माली माता,,,

वर दे, वर दे, दाती वर दे, वर दे ll

तूँ भरे भण्डारों वाली,

अपनी क्यों झोली ख़ाली l

हम चँचल तेरे पुजारी,

लाए पूजा की थाली l

सेवादारों को माता l

अपने प्यारों को माता l

चरणों से जुदा न करना,

हम बेचारों को माता,,,

वर दे, वर दे, दाती वर दे, वर दे ll

खुशियों का वर दे माता l

तूँ किरपा कर दे माता l

*तेरे दर ते खड़े सवाली,

तूँ झोली भरदे माता,,,

वर दे, वर दे, दाती वर दे, वर दे ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।