बालाजी तेरी धज्जा चढ़ाऊंगा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मैं हरियाणे का जाट बालाजी,

तेरी धज्जा चढ़ाऊंगा,

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा,

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा,

मै हरियाणे का जाट बालाजी,

तेरी धज्जा चढ़ाऊंगा।।

दाल चुरमे का भोग बणाया,

तुं आके भोग लगाईए,

प्रेतराज और भैरव नै तुं,

अपणी गैल्या लयाईए,

तेरे और अंजनी मईया के हो हो हो,

तेरे और अंजनी मईया के,

चरण दबाऊंगा,

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा,

मै हरियाणे का जाट बालाजी,

तेरी धज्जा चढ़ाऊंगा।।

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा.......

दुनिया के दुख दुर करण,

तुं मेंहदीपुर आ रहया,

तीन पहाड़ और घाटे आले प,

अपणा डेरा ला रहया,

तुं भजन राम के करिए न हो हो हो,

तुं भजन राम के करिए,

मैं जोत जगाऊंगा,

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा,

मै हरियाणे का जाट बालाजी,

तेरी धज्जा चढ़ाऊंगा।।

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा........

तेरे चरणां में मेरी विनती,

ह्रदय की जोत जगाईए,

रात दिना की सेवा करुं,

ऐसा जतन बताईए,

मन्नै दर्श करादे श्रीराम का हो हो हो,

मन्नै दर्श करादे श्रीराम का,

तने शीश झुकाऊंगा,

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा,

मै हरियाणे का जाट बालाजी,

तेरी धज्जा चढ़ाऊंगा।।

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा.......

गुरू मुरारी बाबा समचाणे में,

धाम बणा स तेरा,

चतुर्भुज तेरा ध्यान धर,

कर्म बणा दिए मेरा,

होली और दिवाली प हो हो हो,

होली और दिवाली प,

तेरा रोट लगाऊंगा,

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा,

मै हरियाणे का जाट बालाजी,

तेरी धज्जा चढ़ाऊंगा।।

मन्नै रख ले अपने चरणां में,

तेरी टहल बजाऊंगा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।