कलयुग की सच्चाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साँच कहूँ सूं सांवरिया मैं,

झूठ बताता ना,

बिन मतलब तो, बिन मतलब तो,

श्याम कोई तेरे दर पे आता ना……

झूठ कपट राखें सै मन में,

छप्पन भोग लगावे,

सवामणी का लालच देकर,

काम कराना चावे,

शृद्धा से करमां सा खींचड़,

कोई खुवाता ना,

बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,

श्याम कोई तेरे दर पे आता ना……

धन दौलत और कोठी बंगला,

माँगे सोना चांदी,

माँगे सोना चांदी, माँगे सोना चांदी,

माया के चक्कर में दुनियाँ,

कितनी हो रही आँधी,

कितनी हो रही आँधी, कितनी हो रही आँधी,

अरे सुदामा सा यार किते कोई टोये (खोजे ) पाता ना,

बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,

श्याम कोई तेरे दर पे आता ना……

एक मुट्ठी का दान करें सै,

और एड (अड्वॅरटाइजमेन्ट) करे सै भारी,

नहीं तेरेते लुखमाँ (छिपा हुआ ) तू जाणे सै सारी,

मीरा नरसी जैसे बनके,

कोई दिखाता ना,

बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,

श्याम कोई तेरे दर पे आता ना……

आजकाल कुछ भगत श्याम तेरे,

हो रहे घणे खुदगर्जी,

मान चाहे मत मान श्याम,

आगे तेरी मरजी,

बिन मतलब तो “भीमसैन” तेरे भजण बनाता ना,

बिन मतलब तो श्याम तेरे कोई भजन सुनाता ना,

बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,

श्याम कोई तेरे दर पे आता ना........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।