तेरी नाह चराऊ गैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी नाह चराऊ गैया री मैया यसोदा री-॥

में दिन निकरे को जाऊ सबरे वन में गूम आऊ-॥

घर भूखो ही सो जाऊ

मेरी ना ले कोई खबिरिया री मैया यसोदा री....तेरी नाह चराऊ

घर में सोबे बड़ो भईया में जाऊ चराने गैया-॥

मेरी बिनती सुन ले मैया

मेरी दुखे नरम कलियाँ री मैया यसोदा री......तेरी नाह चराऊ

ना ध्यान करे मोह माऊ यूं कहदे तेरो नाहु

थोड़ो सो माखन खाऊ

तेरी कहा जा दूद मलियाँ री मैया यसोदा री......तेरी नाह चराऊ

जा नन्द बाबा से कहियो कोई ढूड ग्यारिया लइयो-॥

निदरक गैया चरबयियो

मेरी बाजे मधुर मुरलिया री मैया यसोदा री....तेरी नाह चराऊ

यू वीरेंदर कथ गावे मैया तेरे शीस नवावे-॥

किठ्वारी गाम बतावे

मेरी छोटी सी एक नगरिया री मैया यसोदा री....तेरी नाह चराऊ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।