मेरी रूह साईं तू

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॥ पावन पाठ ॥

(कोई सहारा नहीं एक तेरे सिवा,

कोई सुणदा नहीं इक तेरे सिवा,

मैंने भी जिंदगी को करीब तों वेखा ए,

मुश्किल च कोई साथी नहीं तेरे सिवा)

मेरी रूह साईं तूं, मेरी रूह साईं तूं,

मेरी रूह साईं तूं, मेरी रूह साईं तूं,

मैं ना राही दिल मेरे विच बसिया तू,

नाम साईं दा लेके जींद मेरी करदी अल्लाह हूं,

दिल विच मेरे कख नी रह गया,

कड के ले गया तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू……

दर तेरे जो आंदा ऐ, मन दी मुरादा पांदा ए,

मन दी मुरादा पांदा ए, मन दी मुरादा पांदा ए.....

खाली झोली लाँदा ए भर झोली ले जांदा ए,

भर झोली ले जांदा ए, भर झोली ले जांदा ए......

तू ही मेरा दाता साईयाँ, तू ही मेरा दाता साईयाँ,

मेरा सब कुछ तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू………..

हाल दिला दा सुणदा ए, सब ते कृपा करदा ए,

सब ते कृपा करदा ए, सब ते कृपा करदा ए.....

तू दिला के मथे साईयाँ, सब दे दुखड़े हरदा ए,

सब दे दुखड़े हरदा ए, सब दे दुखड़े हरदा ए......

सब दी बिगड़ी आप बनाये, सब दी बिगड़ी आप बनाये,

अग्गे वध के तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू………..

तू ही सब दा दाता ए, तू ही सब दा बाबा ए,

तू ही सब दा बाबा ए, तू ही सब दा बाबा ए......

तू ही शिरडी वाला साईयाँ, तू ही सब दा काबा ए,

तू ही सब दा काबा ए, तू ही सब दा काबा ए.......

तेरे दर तो मीत मंगदा, तेरे दर तो कपिल मंगदा,

देवे ना देवे तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू,

मेरी रूह साईं तू, मेरी रूह साईं तू………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।