कहाँ जा छुपे हो बांके बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कहाँ जा छुपे हो बांके बिहारी,

आस है तुम्हारी,

मैं तो जीवन से हारी,

मेरे बांके बिहारी, मेरे कुंज बिहारी,

कहाँ जा छुपे हो बांके बिहारी…..

बिरह में रोते रोते जीवन बिताया,

रास्ता निहारूं मेरा साँवरा ना आया,

अब तो खबर ले लो, दुखिया मैं भारी,

आस है तुम्हारी,

मैं तो जीवन से हारी,

मेरे बांके बिहारी, मेरे कुंज बिहारी.......

कैसे भुलाउं तुझे भूल नहीं पाऊँ,

स्वांसों के माला पे मैं नाम तेरा गाउँ,

कान्हां, नाम तेरा गाउँ,

मैं तो उदास डोलूँ बिरह की मारी,

आस है तुम्हारी,

मैं तो जीवन से हारी,

मेरे बांके बिहारी, मेरे कुञ्ज बिहारी........

(अगर दिल कन्हैया, तुझ से लगाया ना होता,

तुझे श्याम अपना बनाया ना होता,

ना फिरती मैं तेरे लिए मारी मारी,

अगर मेरे दिल को तू भाया ना होता,

ज़माना रूठ भी जाए,

कोई परवाह नहीं करते,

हमारी चाहतों को बस तेरा

एक प्यार मिल जाए......)

धड़कन में तू है मेरी,

स्वांसो में तू है,

तू ही मेरा देवता है,

तू ही मेरी रूह है,

मधुर श्याम मेरा जीवन,

पतझड़ की डाली,

आस है तुम्हारी,

मैं तो जीवन से हारी,

मेरे बांके बिहारी, मेरे कुञ्ज बिहारी,

कहाँ जा छुपे हो बांके बिहारी,

आस है तुम्हारी,

मैं तो जीवन से हारी,

मेरे बांके बिहारी, मेरे कुञ्ज बिहारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।