चांदनी फीकी पड़ जाये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चांदनी फीकी पड़ जाये,

चमक तारा री छिप जाए,

मेरे कृष्ण चंद्र के तेज सामने,

सूरज शर्माए,

चाँदनी फीकी पड़ जाए।।

नील गगन सो रूप,

कृष्ण को घुँघर वाला बाल,

मोहन मूरत ह्रदय में बस गई,

कटे घोर जंजाल,

काल फिर पास नहीं आए,

मेरे कृष्ण चंद्र के तेज सामने,

सूरज शर्माए,

चाँदनी फीकी पड़ जाए।।

पीली पीताम्बर केसरी खटका,

होठ रसीला लाल,

मुक्त हो गए सूद बुद खो गए,

ब्रज के गोपी ग्वाल,

के चरण चाट रही गायें,

मेरे कृष्ण चंद्र के तेज सामने,

सूरज शर्माए,

चाँदनी फीकी पड़ जाए।।

मथुरा महल में छुपकर बैठा,

डरा डरा वो कंस,

कृष्ण नाम की महिमा गाये,

यदुवंशी को वंश,

कृष्ण यदुवंशी मन भाए,

कृष्ण यदुवंशी कहलाए,

मेरे कृष्ण चंद्र के तेज सामने,

सूरज शर्माए,

चाँदनी फीकी पड़ जाए।।

देख कृष्ण की छवि यशोदा,

मन में करें गुमान,

मेरे अंगना में अवतारी,

परम ब्रम्ह भगवान,

की महिमा ये कविता गाए,

मेरे कृष्ण चंद्र के तेज सामने,

सूरज शर्माए,

चाँदनी फीकी पड़ जाए।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।