तेरी डमरू की धुन सुनके

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरी डमरू की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूं

मेरे भोले ओ बम भोले मैं काशी नगरी आई हूं

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में मुक्ति है

उसी गंगा में नहाने को मैं काशी नगरी आई हूं

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में गंगा है

उसी गंगा को पाने को मैं काशी नगरी आई हूं

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में मन्दिर है

उसी मन्दिर में पूजा को काशी नगरी आई हूं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।