मेरी दुनिया तुम ही हो

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी दुनिया तुम ही हो,

दुनिया से क्या माँगू,

जब बिन बोले मिलता,

तो बोल के क्या माँगू।।

धन दौलत क्या माँगू,

मुस्कान ये दी तुमने,

हम जैसे बच्चो को,

पहचान है दी तुमने,

किस्मत को बनाते हो,

किस्मत से क्या माँगू,

मेरी दुनिया तुम ही हो.......

कोई मुझसे अगर पूछे,

जन्नत कैसी होगी,

दावे से कह दूंगा,

मांडोली जैसी होगी,

जीते जी स्वर्ग मिला,

तो मर कर क्या माँगू,

मेरी दुनिया तुम ही हो......

भक्ति की बदौलत ही,

दुनिया का प्यार मिला,

मुझे ये परिवार मिला,

ऐसा संसार मिला,

तेरी भक्ति करता रहूं,

कर जोड़ यही माँगू,

मेरी दुनिया तुम ही हो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।