बाँधु जिसपे राखी

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बाँधु जिसपे राखी,

वो कलाई चाहिए,

बहना कहने वाला,

एक भाई चाहिए माँ,

माँ पूरी मेरी आस कर,

खड़ी मैं कब से तेरे दर।।

हिरे मोती सोना चांदी, मांगू कब माँ,

बंगले की गाडी की भी, कोई चाह ना....-2

सुना सुना लगे जग, भाई के बिना,

आँख हो जैसे रोशनाई के बिना,

दीपक हूँ मैं तेल बाती के बगैर,

डाल दो माँ झोली में, मुरादो वाली खैर,

सारी दुनिया ना, ना खुदाई चाहिए,

बहना कहने वाला,

एक भाई चाहिए माँ,

माँ पूरी मेरी आस कर,

खड़ी मैं कब से तेरे दर।।

जब जब राखी का, त्यौहार आए माँ,

अँखियों में मेरे आंसू, भर आए माँ...-2

बात नहीं मैया कुछ, मेरे बस की,

लाख रोकू रुक नहीं, पाती सिसकी,

हर सिसकी ने यही, शिकवा किया,

मैया तूने काहे एक, भाई ना दिया,

सिसकियों की होनी, सुनवाई चाहिए,

बहना कहने वाला,

एक भाई चाहिए माँ,

माँ पूरी मेरी आस कर,

खड़ी मैं कब से तेरे दर।।

दुःख सुख बांटे जो, सरल स्वभाव हो,

पूरा मेरे मन का, हर चाव हो...-2

देख देख मुखड़ा मैं, वारि जाउंगी,

बाधूंगी राखी मैं, टिका लगाऊंगी,

होगी जब शादी, फूली ना समाऊँगी,

गाउंगी मैं घोड़ियां, शगन मनाऊंगी,

गाने को ‘लख्खा’, बस बधाई चाहिए,

बहना कहने वाला,

एक भाई चाहिए माँ,

माँ पूरी मेरी आस कर,

खड़ी मैं कब से तेरे दर।।

बाँधु जिसपे राखी,

वो कलाई चाहिए,

बहना कहने वाला,

एक भाई चाहिए माँ,

माँ पूरी मेरी आस कर,

खड़ी मैं कब से तेरे दर।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।