क्या भरोसा हैं इस जिंदगी का

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कहाँ से आया जाना कहाँ,

आखिर कहाँ मुकाम,

बन्दे कर ले बंदगी,

कर नेकी के काम।

क्या भरोसा हैं इस जिंदगी का,

साथ देती नहीं ये किसी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का।।

सांस रुक जाएगी चलते चलते,

(सौ सिकंदर चल बसे,

गए कई धनवान,

दौलत यहाँ पर रह गई,

समझ जरा नादाँ,

समझ जरा नादाँ,

साथ में कौन है आता,

कर भजन भगवान का,

राम से जोड़ ले नाता,

राम से जोड़ ले नाता।)

सांस रुक जाएगी चलते चलते,

शम्मा बुझ जाएगी जलते जलते,

दम निकल जाएगी रौशनी का,

दम निकल जाएगी रौशनी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का।।

हम रहे ना मोहब्बत रहेगी,

(मैं करूँ मैंने किया,

ऐसा कभी ना बोल,

तेरे बिना भी चलती थी,

दुनिया बड़ी अनमोल,

आया है सो जाएगा,

राजा रंक फ़क़ीर,

कोई सिंहासन चढ़ गया,

कोई बांध गया जंजीर।)

हम रहे ना मोहब्बत रहेगी,

दास्ताँ अपनी दुनिया कहेगी,

नाम रह जाएगा आदमी का,

नाम रह जाएगा आदमी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का।।

दुनिया है एक हकीकत पुरानी,

(अपनी अपनी बोलियां,

सब बोल के उड़ जाएंगे,

हम बागबां है क्या करे,

देखते रह जाएंगे,

जाने वाले जाते यहाँ से,

वापस मिल ना पाएंगे,

रुकते नहीं है जाने वाले,

याद बहुत वो आएँगे।)

दुनिया है एक हकीकत पुरानी,

चलते रहना है उसकी रवानी,

फर्ज पूरा करो बंदगी का,

फर्ज पूरा करो बंदगी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का।।

साथ देती नहीं ये किसी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का,

क्या भरोसा है इस जिंदगी का।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।