जागो वंशीवारे ललना

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

रजनी बीती भोर भयो है , घर घर खुले किवारे ,

गोपी दही मथत सुनियत है कंगना के झनकारे !!

जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाढे द्वारे ,

ग्वाल बाल सब करत कुलाहल ,जय जय शब्द उचारे !!

जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

माखन रोटी हाथ में लीजे गौवन के रखवारे ,

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ,सरन आया को तारे !!

जागो वंशीवारे ललना जागो मोरे प्यारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।