चूरमा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माँ तू मेरा कहण पुगादे री

माँ तू मेरा कहण पुगादे री

मेरे भोले खातर चूरमा बना दे री ...-2

नीलकंठ पे जाके नै मैं जल चढ़ाऊंगा,

भोल के दर्शन करके मैं खुश हो जाऊंगा,

म्हारा दोनुआ का मेल तू करादे री -2

मेरे भोले खातर चूरमा बना दे री......

भोले के दर पे जाके मैं शीश झुकाऊंगा,

देशी घी के चूरमे का मैं भोग लगाऊंगा,

भोला बिगड़ी बात नै बणा दे री -2

मेरे भोले खातर चूरमा बना दे री.....

कहण तै पहले भोला मेरे काम बणावेगा,

माँ जाके नै हर साल मन्नू कावड़ लयावेगा,

इब चूरमे का थाल सजादे री -2

मेरे भोले खातर चूरमा बना दे री.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।