आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां

पीघां झूट दीयां दरबार सतो भैणा झूट दीयां

ऐह तां जग दी पालनहार सतो भैणा झूटदीयां

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां....

पहला हुलारा मैया मैना देवी देंदी ऐ,

सब भक्ता दे सारे दुख हर लेंदी ऐ,

ऐह तां करदी देखो सबदे बेङे पार सतो भैणा झूट दीयां,

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां....

दुजा हुलारा मैया चिन्तपूर्णी देंदी ऐ,

बच्चेआ निमाणेआ दी चिन्ता हर लैंदी ऐ,

चिन्ता हर लवे सुख देवे सुख बेशुमार सतो भैणा झूट दीयां,

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां....

तीजा हुलारा मैया ज्वालारानी लांदी ऐ,

भक्ता निमाणेआ दे अगं सगंत रहंदी ऐ,

दुख आले दूर करे अन्धकार सतो भैणा झूट दीयां,

ऐह तां जग दी पालनहार सतो बहना झूटदीयां

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां....

चौथा हुलारा मैया बावे आली लांदी ऐ

भक्ता प्यारेआ दे अगं सगं रहंदी ऐ

ऐह तां सब करदी बेड़े पार सतो भैणा झूट दीयां

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां....

पजंवा हुलारा माँ वैष्णो रानी लांदी ऐ,

भक्ता दे घर करदी ऐ मेहेर वाली छाया,

ऐह तां वसदी त्रिकुटा पहाड़ सतो भैणा झूटदीयां,

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां....

छेवां हुलारा मैया मनसा देवी लाया,

आप भक्ता दी मुराद नु माँ पुगाया,

बेङे भक्ता दे देंदी मैया तार सतो भैणा झूटदीयां,

विच वैष्णो सजया दरबार सतो भैणा झूटदीयां,

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां....

सतंवा हुलारा माँ मचेलावाली लांदी ऐ,

दर आये भक्ता दी झोली भर देंदी ऐ,

लगे स्वर्गा तो सोहणा दरबार सतो भैणा झूट दीयां

आई सोण वाली ठण्डड़ी फुहार सतो भैणा झूट दीयां...

मेरी मातारानी दे दरबार सतो भैणा झूट दीयां...

पीघां झूट दीयां दरबार सतो भैणा झूट दीयां.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।