छुप छुप माखन चुराने का क्या राज है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ज़रा सामने तो आओ, गोपाल जी,

छुप छुप माखन चुराने का क्या राज़ है,

तुम छुप ना सकोगे नन्द लाल जी,

माँ यशोदा के मन की आवाज है,

ज़रा सामने तो आओ, गोपाल जी…..

हम तुम्हें खिलाएँ, तुम नहीं खाओ,

ऐसा कभी ना हो सकता,

भक्तों के हाथों भोग ना लगाओ,

ऐसा कभी ना हो सकता...-2

अब आ भी जा नन्द के लाला,

ग्वाल बालों की ये आवाज़ है,

तुम छुप ना सकोगे नन्द लाला,

माँ यशोदा के मन की आवाज है,

ज़रा सामने तो आओ, गोपाल जी…..

आ के तोड़ मेरी दहिया की मटकी,

तेरे लिए ही संभाली है,

माखन सजाया, मिश्री सजाई,

सज गयी भोग की थाली है...-2

सबके मन की तू जाने मोहन,

सबके दिल का तो तू ही सरताज है,

तुम छुप ना सकोगे नन्द लाला,

माँ यशोदा के मन की आवाज है,

ज़रा सामने तो आओ, गोपाल जी……

बंसी की धुन, हमें मधुर सुना दो,

भगतों ने तुमको पुकारा है,

“चन्दन” कहता इस कलियुग में,

तू ही तो भव का किनारा है...-2

तूने द्रौपदी सुदामा की मोहन,

जैसे बचाई लाज़ है,

तुम छुप ना सकोगे नन्द लाला,

माँ यसोदा के मन की आवाज है,

ज़रा सामने तो आओ, गोपाला....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।