मैं जीत नहीं माँगू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं जीत नही मांगू,

मुझे हार दे देना,

क्या करूँ किनारे का,

मजधार दे देना....-2

अक्सर देखा मैंने,

जब तूफां आता है,

तेरे सेवक का बाबा,

मनवा घबराता है,

रो रो कर कहता है,

मुझे पार कर देना,

क्या करूँ किनारे का,

मजधार दे देना……

मजधार में हो बेटा,

तू देख ना पाता है,

लेके हाथों में हाथ,

उसे पार लगाता है,

तेरा काम है हारी हुई,

बाजी को बदल देना,

क्या करूँ किनारे का,

मजधार दे देना……

नैया को किनारे कर,

उसे छोड़ जाता तू,

रहता वो किनारे पे,

वापस नही आता तू,

मस्ती में वो रहता,

फिर क्या लेना देना,

क्या करूँ किनारे का,

मजधार दे देना……

मजधार में हम दोनों,

एक साथ साथ होंगे,

कहता है ‘श्याम’ तेरा,

हाथों में हाथ होंगे,

ना किनारे हो नैया,

मुझको वो दर देना,

क्या करूँ किनारे का,

मजधार दे देना……

मैं जीत नही मांगू,

मुझे हार दे देना,

क्या करूँ किनारे का,

मजधार दे देना……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।