माता दे द्वारे दिल अज असां खोलना

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माता दे द्वारे दिल अज असां खोलना...-3

ममता दे सागर च तन मन घोलना

माता दे द्वारे दिल अज असां खोलना.....

किछ विच पहलां नहीयो उंदे कोलां डरना,

मन आला भेद सारा भेद अँखीये च भरना...-2

चंगे कम करी जाने जियड़ा नी डोलना,

माता दे द्वारे दिल अज असां खोलना...

असां अनभोले माता लाज साडी रखनी,

भक्ते दी गोद माता रवे नहियो सखनी...-2

दुख सुख माता तुंदे कनेगे फरोलना,

माता दे द्वारे दिल अज असां खोलना...

संगते दे चेहरे चेहरे रूप तुन्दा दिखना,

हीरख पतारू पैरी रहना जेड़ा सखना...-2

चंगे कम करी जाने मंदड़ा नी बोलना,

माता दे द्वारे दिल अज असां खोलना...

ममता दे सागरे च तन मन घोलना

माता दे द्वारे दिल अज असां खोलना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।