भांग की आदत छोड़ दे भोला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बोली गौरी सुनो भोला,

बात मेरी ध्यान से सुनलो

मुझे या भांग दोनों में,

कोई भी एक तुम चुन लो

चली मैं जाउंगी वरना तुम्हे छोड़ कर....

बोली गौरी सुनो भोला,

बात मेरी ध्यान से सुनलो.....

जबसे लाये हो तुम ब्याह करके मुझे,

मुझसे प्यारी लगे भोला भंगिया तुझे

ना दया है ना दिल में तेरे प्यार है,

मेरे अरमानो के सारे दीपक बुझे

तेरे दिल में हमारी नहीं है कदर...

बोली गौरी सुनो भोला,

बात मेरी ध्यान से सुनलो....

भांग पीने की आदत तू ये छोड़ दे,

वरना तू मुझसे रिश्ता अभी तोड़ दे

बन गई मेरी सौतन ये भंगिया तेरी,

भांग की मटकी भोला अभी फोड़ दे

घोला भंगिया ने जीवन मेरे ज़हर...

बोली गौरी सुनो भोला,

बात मेरी ध्यान से सुनलो....

फैसला अब ये भोला तेरे हाथ है,

भांग या रहना तुमको मेरे साथ है

दोनों बच्चे सँभालु या भंगिया घिसूँ,

ध्यान बच्चों का भी न तुम्हे नाथ है

कुंदन बिलकुल नहीं है हमारी फिकर...

बोली गौरी सुनो भोला,

बात मेरी ध्यान से सुनलो।

मुझे या भांग दोनों में,

कोई भी एक तुम चुन लो

चली मैं जाउंगी वरना तुम्हे छोड़ कर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।