मेरो प्यारो नन्दलाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे,

किशोरी राधे अति भोरी राधे........

प्यारी जू प्यारे की जीवन,

प्यारो प्यारी प्राण आधार

प्यारी प्यारे के उर हार,

प्यारो प्यारी के उर हार

प्यारे प्यारे रंगमहल में,

रँग भरे दो करत विहार....

रंग भरी निरखत हरकत हिय,

श्री हरि प्रिया सकल सुख सार

प्यारी जू प्यारे की जीवन

प्यारो प्यारी प्राण आधार

मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे

किशोरी राधे अति भोरी राधे................

प्रीतम की प्यारी प्रिया

प्रिया प्राण प्यारे प्रियो,

दउअन की दो छवि सिंधु में तरावे है

दऊ नव करे खेल, दऊ भुज अंश मेल,

दऊ सुख झेल झेल मंद मुस्कावे है,

लाल बलवीर वनराज के विलासी दऊ

सखिन चकोरन के लोचन सिरावे है,

गावे राग रागिनी रसीले चटकीले मुख

मधुर मधुर वैण बांसुरी सुनावे है..........

मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे.................

किशोरी राधे रस भोरी...........

मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।