अखियाँ दी बारी विचों

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अखियाँ दी बारी विचों दिल विच आ, फेर जा के विखा

दिल नु लेआ ए तेरा मंदर बना, फेर जा के विखा

अखियाँ दी बारी विचों दिल विच आ.....

मेरे दिल विच तेरे लई बड़ी थांह ए,

तेरे लई बनेया दिल दा मकान ए,

हर पासे रानिये नी जलवा तेरा फेर जा के विखा

अखियाँ दी बारी विचों दिल विच आ.....

नैंना विच पहलां ही वसाई तेरी मुर्ति,

असी झण्डेवालिये सजाई तेरी मुर्ति,

रानिये नी दित्ती तेरी जोत जगा फेर जा के विखा

अखियाँ दी बारी विचों दिल विच आ.....

कहन्दे तू ए अम्मिये नी मूर्ति प्यार दी,

माता सारे जग दी तू रानी सारे संसार दी,

चंचल भी दातिए नी बचड़ा तेरा फेर जा के विखा

अखियाँ दी बारी विचों दिल विच आ फेर जा के विखा

दिल नु लेआ ए तेरा मंदर बना फेर जा के विखा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।