अज्ज तेरी कल मेरी वारी आएगी

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अज्ज तेरी, कल मेरी, वारी आएगी l

हे माँ झण्डेवाली, सब पे कर्म कमाएगी ll

अंधेर नहीं होगा, देर लग जाएगी l

माँ झण्डेवाली, सब पे कर्म कमाएगी l

अज्ज तेरी, कल मेरी, वारी आएगी xll

हिम्मत रख, भरोसा रख xll

क्यों है दुखों से चूर, वारी आएगी जरूर l

लाखों करोड़ों हैं दर से, मांगने वाले l

तूँ भी आ के अपनी, झोली फैला ले ll

मेहरांवाली अम्बे, माँ मेहर करेगी l

संकट सबके टालेगी, ना देर करेगी l

कर देगी, वर दाती, खुशिओं से भरपूर,

वारी आएगी जरूर xll

हिम्मत रख, भरोसा रख xll

उसके दर पे होती, सबकी सुनवाई l

कभी किसी की अर्ज़ी, माँ ने ना ठुकराई l

उसके आगे, समय का चलता, फेर नहीं है l

देर भले हो जाए, पर अंधेर नहीं है l

सुनने को, तेरी बिनती, हो जाएगी मज़बूर,

वारी आएगी जरूर xll

हिम्मत रख, भरोसा रख xll

जग में तुमसे ज्यादा, कोई सुखी नहीं है l

कौन है चंचल जग में, जो दुःखी नहीं है l

दुःख सुख के तो, चारों ओर लगे हैं मेले l

इस के, चक्र में तो, हम ही नहीं अकेले l

धुप और छाँव, रहेंगे सदा, *यह जग का दस्तूर,

वारी आएगी जरूर xll

हिम्मत रख, भरोसा रख xll

क्यों है दुखों से चूर, वारी आएगी जरूर l

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।