माँ की कृपा पर ए बंदे सब छोड़ दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जब जीवन में उलझन हो,

सूझे ना कोई राह तुम्हे,

दयँ लगा जगदम्बे का,

वही करेगी पार तुझे......

माँ की कृपा पर ए बंदे सब छोड़ दे,

सांस सांस माँ के चरणों से जोड़ दे,

मोहमाया के सारे बन्धन तोड़ दे,

सांस सांस माँ के चरणों से जोड़ दे,

माँ की कृपा पर ए बंदे.......

कैसी भी मुश्किल हो समय कट जायेगा,

लेकिन तेरा कुछ भी बिगड़ ना पायेगा

लेकिन तेरा कुछ भी बिगड़ ना पायेगा.....

हर चिंता तू मैया पर ही छोड़ दे,

सांस सांस माँ के चरणों से जोड़ दे,

माँ की कृपा पर ए बंदे......

रोम रोम में नाम बसा ले मैया का,

कष्ट मिटे जब मिले सहारा मैया का

कष्ट मिटे जब मिले सहारा मैया का....

जीवन अपना माँ के दर पर मोड़ दे,

सांस सांस माँ के चरणों से जोड़ दे,

माँ की कृपा पर ए बंदे........

ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा दुनिया में,

कैसा कैसा फेर है देखा दुनिया मे

कैसा कैसा फेर है देखा दुनिया मे.....

बस इक माँ का नाम है बाकी छोड़ दे,

सांस सांस माँ के चरणों से जोड़ दे,

माँ की कृपा पर ए बंदे सब छोड़ दे,

सांस सांस माँ के चरणों से जोड़ दे,

मोहमाया के सारे बन्धन तोड़ दे,

सांस सांस माँ के चरणों से जोड़ दे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।