तेरी इक हंसी ने

विनोद अग्रवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरा सिजदा न करूं,

तेरी इबादत न करूं,

लेकिन ये मेरे वश में नहीं,

कि मैं मोहब्बत न करूं....

हे गोविंद, हे गोपाल

तेरी इक हंसी ने लाखों पागल बना दिए हैं,

अब किस से जा कहें क्या, जो कुछ बना दिए हैं....

ऐ मेरे हसीन साकी रहो खुश सदा जहाँ में,

कई जाम मस्तियों के, मुझको पिला दिए हैं....

न वो दिल की बेकरारी, न किसी से कोई शिकवा,

तूने मुस्कुरा के सारे झगड़े मिटा दिए हैं....

(मुझे शिकवा करने की आदत नहीं है,

शिकायत तो कोई इबादत नहीं है,

जो शिकवा शिकायत हैं करने के आदि,

समझ लो कि उनको मोहब्बत नहीं है.......)

न वो दिल की बेकरारी ......

दिल दीवाना हो चुका है सांवरी सरकार का,

भर चुका है जाम अब तो उनकी मोहब्बत के नाम का.....

एक नज़र डाली थी मुझपे, बन गई उनकी गुलाम,

कुछ पता चलता नहीं, अब जीत का और हार का.....

(जद इश्क दी मंजिल तय हो जाए, हस्ती ते बुलन्दी नहीं रहन्दी

मैनू कसम है बन्दे ते मौला विच, कोई हदबंदी वी नहीं रहन्दी)

दिल दीवाना हो चुका है सांवरी सरकार का......

तेरी तस्वीर क्या देख ली सांवरे,

मेरी जान लुट गई मेरा दिल लुट गया.....

वंशी लबों से लगाई हुई,

मंद मुस्कान होंठों पे छाई हुई,

ज़ुल्फ़ काली घटा जैसे छाई हुई,

मेरे हमदम मेरे मेहरबान लुट गया.......

तेरी तस्वीर क्या देख ली सांवरे.....

हाय बाँके की बांकी अदा क्या कहूं,

तीर नैनों के उसके मैं कैसे सहूँ,

उसके मिलने बिना अब मैं कैसे रहूँ.....

मेरा चैन लुट गया, अरमां लुट गया,

मेरी जान लुट गई, मेरा दिल लुट गया...

गोपाल सांवरिया मेरे, नन्दलाल सांवरिया मेरे,

गोपाल सांवरिया मेरे, नन्दलाल सांवरिया मेरे

मेरा कोई नहीं बिन तेरे, नन्दलाल सांवरिया मेरे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।