कई जन्मो से बुला रही हो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कई जन्मो से बुला रही हो कोई तो रिश्ता जरूर होगा,

कई जन्मो से बुला रही हो कोई तो रिश्ता जरूर होगा,

मेरी नजर को नजर ना आओ ,

मेरी नज़र का कसूर होगा,

कई जन्मो से बुला रही हो......

तुम्ही तो मेरे माता पिता हो,

तुम्ही तो मेरे बंधू सखा हो,

कितने ही रिश्ते तुम संग जोड़े,

रिश्ता निभाना तो जरूर होगा,

कई जन्मो से बुला रही हो.....

तुम्ही तो हो मेरी माँ शेरोवाली,

तुम्ही तो हो मेरी माँ मेहरोंवाली,

शरण में तेरी आ ही गई हो,

चरणों का नाता जरूर होगा,

कई जन्मो से बुला रही हो.....

तुम्ही तो मेरी आत्मा हो,

तुम्ही तो मेरी परमात्मा हो,

तेरे बिन मैं रह नही पाऊँ,

दर्श दिखाना जरूर होगा,

कई जन्मो से बुला रही हो......

तुम ही तो माँ मेरी बिगड़ी सवारे,

तुम ही तो माँ मेरे काज सवारे,

जबसे लग्न माँ लगी है तेरी,

भक्ति में कुछ तो जरूर होगा,

कई जन्मो से बुला रही हो कोई तो रिश्ता जरूर होगा,

मेरी नजर को नजर ना आओ मेरी नज़र का कसूर होगा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।