फूलों मे सज रहे हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फूलों मे सज रहे हैं

फूलों मे सज रहे हैं

श्री वृंदावन बिहारी

फूलों मे सज रहे हैं

श्री वृंदावन बिहारी

और संग मे सज रही है

वृषभानु की दुलारी

फूलों मे सज रहे हैं....

टेढ़ा सा मुकुट सर पर

रखा है किस अदा से

करुणा बरस रही है

करुणा भरी निगाह से

बिन मोल बिक गयी हूँ

बिन मोल बिक गयी हूँ

जब से छवि निहारी

फूलों मे सज रहे हैं....

बहियाँ गले में डाले

जब दोनों मुसकुराते

सबको ही प्यारे लगते

सबके ही मन को भाते

इन दोनों पे मैं सदके

इन दोनों पे मैं सदके

इन दोनों पे मैं वारी

फूलों मे सज रहे हैं....

चुन चुन के कलियाँ जिसने

बंगला तेरा बनाया

दिव्य आभूषणो से

जिसने तुझे सजाया

उन हाथों पे मैं सदके

उन हाथों पे मैं सदके

उन हाथों पे मैं वारी

फूलों मे सज रहे हैं

श्री वृंदावन बिहारी.......

और संग मे सज रही है

और संग मे सज रही है

वृषभानु की दुलारी

फूलों मे सज रहे हैं

फूलों मे सज रहे हैं.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।