जब छोड़ चलू इस दुनिया को

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब छोड़ चलू इस दुनिया को, होंठो पे नाम तुम्हारा हो,

चाहे स्वर्ग मिले या नरक मिले, हृद्या मे वास तुम्हारा हो,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को,

तंन श्याम नाम की चादर हो, तंन श्याम नाम की चादर हो,

जब गहेरी नींद मेी सोया राहु, जब गहेरी नींद मेी सोया राहु,

कानो मे मेरे गूंजीत हो, कानो मे मेरे गूंजीत हो, कान्हा बस नाम तुम्हारा हो,

कानो मे मेरे गूंजीत हो, कान्हा बस नाम तुम्हारा हो,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को,

रास्ते मे तुम्हारा मंदिर हो, रास्ते मेी तुम्हारा मंदिर हो,

जब मंज़िल को प्रस्थान करू, जब मंज़िल को प्रस्थान करू,

चोखत पे तेरी मनमोहन, चोखत पे तेरी मनमोहन, अंतिम परिणाम हमारा हो,

चोखत पे तेरी मनमोहन, अंतिम परिणाम हमारा हो,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को,

उस वक़्त कन्हैया आजना, उस वक़्त कन्हैया आजना,

जब चिट आपे जाके शयन करू, जब चिट आपे जाके शयन करू,

मेरे मुख मेी तुलसी दल देना, मेरे मुख मेी तुलसी दल देना, इतना बस कम तुम्हारा हो,

मेरे मुख मेी तुलसी दल देना, इतना बस कम तुम्हारा हो,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को,

बार सेवाकी मैने तेरी, बार सेवाकी मैने तेरी,

तो उसका ये उफार मिले, तो उसका ये उफार मिले,

इस हर्ष भगत का सावारिय, इस हर्ष भगत का सावारिय, नही आना कभी भी दुबारा हो,

इस हर्ष भगत का सावारिय, नही आना कभी भी दुबारा हो,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को, होंठो पे नाम तुम्हारा हो,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को, होंठो पे नाम तुम्हारा हो,

चाहे स्वर्ग मिले या नरक मिले, हृद्या मेी वास तुम्हारा हो,

चाहे स्वर्ग मिले या नरक मिले, हृद्या मेी वास तुम्हारा हो,

जब छोड़ चालू इस दुनिया को,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।