कोयल बोले याद सताए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरे हरे बागों में गौरा झूले,

ठंडी हवा चले सावन की,

कोयल बोले याद सताए,

भोले नाथ मन भावन की....-2

हाँ हाँ हरे हरे बागों में गौरा झूले

ठंडी हवा चले सावन की

कोयल बोले, कोयल बोले याद सताए

भोले नाथ मन भावन की

भोले नाथ मन भावन की.....

कभी तो मिलेंगे, कहीं तो मिलेंगे,

इच्छा बतानी है मन की,

हाँ हाँ कभी तो मिलेंगे, कहीं तो मिलेंगे,

इच्छा बतानी है मन की,

बहार बिना कोई कदर नहीं है,

खिलते हुए इस उपवन की,

अरे खिलते हुए इस उपवन की,

हाँ खिलते हुए इस उपवन की,

जाने कब आवाज सुनेगे,

पायल की इस खन खन की,

हरे हरे बागों में गौरा झूले.......

सारी सखियाँ गायें मल्हारी,

गुड़िया, चिड़िया आँगन की,

सारी सखियाँ गायें मल्हारी,

गुड़िया, चिड़िया आँगन की,

शिव की दीवानी हो गयी स्यानी,

समय रही ना बचपन की,

हाँ समय रही ना बचपन की,

अरे समय रही ना बचपन की,

52 चिट्टी लिख लिख डाली,

पुरे हप्ते बावन की

अरे 52 चिट्टी लिख लिख डाली,

पुरे हप्ते बावन की

हरे हरे बागों में गौरा झूले.....

तीन लोक में चर्चा कमल सिंह,

शिव योगी की योगन की,

तीन लोक में चर्चा कमल सिंह,

शिव योगी की योगन की,

रुत सावन की जब जब आये,

बढ़ी लालसा दर्शन की,

अरे बढ़ी लालसा दर्शन की,

हाँ बढ़ी लालसा दर्शन की,

जय शिव जय शिव जपते जपते,

समय बीत जाये जीवन की,

अरे हरे हरे बागों में गौरा झूले

ठंडी हवा चले सावन की

कोयल बोले याद सताए

भोले नाथ मन भावन की.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।