माँ पहाडां वालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा नहीं है कुछ भी

सब कुछ तेरा दिया है,

कृपा हुई है ऐसी

बिन मांगे सब दिया है,

जैसा तू चाहे मैया

वैसा मैं चलता जाऊं,

जिसमे हो तेरी महिमा

वैसे ही गीत गाऊं,

ओ माँ पहाडां वालिये,

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

ओ माँ पहाडां वालिये,

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना.....

अपने हुए पराये,

दुश्मन हुआ ज़माना,

अपने हुए पराये,

दुश्मन हुआ ज़माना,

कष्टों से मेरी मैया,

तुही मुझे बचाना,

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना

फूलों में तुझको ढूंढा,

कलियों में तुझको ढूंढा,

तू कही नज़र ना आयी,

ओ माँ पहाडां वालिये,

सुन ले मेरा तराना

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना

ओ मेरी शेरा वाली मैया

मेरी जोता वाली मैया

मेरे साथ है

सर पे हाथ है

ओ मेरी शेरा वाली मैया

मेरी जोता वाली मैया

मेरे साथ है

सर पे हाथ है

ओ मेरी शेरा वाली मैया

मेरी जोता वाली मैया

मेरे साथ है

सर पे हाथ है

ओ मेरी दुर्गे मैया काली

मेरी मेहरा वाली मैया

मेरे साथ है

सर पे हाथ है

सर पे हाथ है

सबकी सुने तू मैया

राजा हो या फकीरा

सबकी सुने तू मैया

राजा हो या फकीरा

बाबा की ये तमन्ना

मेरा भी सुन तराना

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

सुन ले मेरा तराना

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना

ओ माँ पहाडां वालिये

सुन ले मेरा तराना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।