मेरा हृदय तुम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरा हृदय तुम हो श्वास तुम ही,

रहती सदा हो मेरे पास तुम ही,

अर्धांग मेरे आराध्य तुम हो,

सिंदूर तुम भी सौभाग्य तुम हो,

क्षण भर भी तुमसे दूर हो जाऊं

समय ना बीते,

सीते मेरी प्रिया तुम सीते

सीते मेरी प्रिया तुम सीते

मेरे राम मेरे प्रियवर राम

मेरे राम मेरे प्रियवर राम

नैनो में तुम अंजन भरो मेरे नाम का,

अस्तित्व तुमसे हैं तुम्हारे राम का,

मीत बनके रखते मेरा मान हो,

निश्प्राण सी तुम बिन मैं तुम मेरे प्राण हो,

प्रेम ये कभी ना कम

कभी हो जो भी हो परिणाम

मेरे राम मेरे प्रियवर राम

मेरे राम मेरे प्रियवर राम

सीते मेरी प्रिया तुम सीते

सीते मेरी प्रिया तुम सीते

रोम रोम में राम का आभास हो,

प्रेम पावन मन की तुम ही प्यास हो,

चलती हो बनके संग जीवन संगिनी,

मैं धन्य हूं तुम हो मेरी अर्धांगिनी,

प्रेम की परिभाषा

तुमसे सारा जग ये सीखे

सीते मेरी प्रिया तुम सीते

सीते मेरी प्रिया तुम सीते

मेरे राम मेरे प्रियवर राम

मेरे राम मेरे प्रियवर राम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।