अष्टमी का दिन है

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अष्टमी का दिन है,

अच्छा शगूण है,

पूज ले तू छोटी कंजका,

कंजक रूप में, नन्हे सवरूप में,

मईया मिलेगी तुझे आ,

अष्टमी का दिन है.......

भक्तो आओ,

मौली बंधाओ, टीका लगाओ, आयी माँ,

भेंटे गाओ, प्रसाद पाओ,

खुशीआं है लायी मेरी माँ,

ज्योति जगाओ, चुनरी चढ़ाओ,

के चुनरी में सजे मेरी माँ...-2

अष्टमी का दिन है.......

सच्ची लगन है,

नाचने का मन है,

नाच के मनाऊ मेरी माँ,

झोली पसार के, आरती उतार के,

तुझको रिजाऊ मेरी माँ,

पान सुपारी है, मिन्नत हमारी है,

भोग लगाओ मेरी माँ,

के भोग लगाओ मेरी माँ -2

अष्टमी का दिन है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।