धर्म को डर नहीं

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

धर्म को डर नहीं दुनिया रे माँय ,

धणियाँ बिना तो आज सूनी फिरे गाय ।

कटवाने चाली आज काना थारी गाय ,

सुणो – सुणो म्हारा सांवरा कुण करे सहाय ।।

समुद्र मंथन काम धेनु प्रगटाय ,

तन में तैतीस कोटी देवता समाय ।

गो से गोपाल नाम सांवरो कहाय ,

सुणो – सुणो म्हारा सांवरा कुण करे सहाय ।।

धर्म को डर नहीं दुनिया रे माँय.....

गोबर भी शुद्ध यज्ञ आंगणो लिपाय ,

मूत्र भी पवित्र सर्व मंगला कहाय ।

दर्शन करता ही पाप मिट जाए ,

सुणो – सुणो म्हारा सांवरा कुण करे सहाय ।।

धर्म को डर नहीं दुनिया रे माँय.....

दूध है पवित्र सारा देवता नहाय ,

पंच गव्य रोगों ने तो जड़ सूं मिटाय ।

अनमोल हीरो आज कचरा में जाय ,

सुणो – सुणो म्हारा सांवरा कुण करे सहाय ॥

धर्म को डर नहीं दुनिया रे माँय.....

भोली – भाली सूरत में ममता समाय ,

शक्ति स्वरूप गौ माता कहलाए ।।

सेवा बिना वैतरणी पार कैसे पाय ,

सुणो – सुणो म्हारा सांवरा कुण करे सहाय ॥

धर्म को डर नहीं दुनिया रे माँय.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।