दर्द ना जाने कोई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

काजल लागे किरकरो,

ओर सुरमो सयो नही जाय,

जिन नैना मोहन बसे,

तो दूजो किया रे समाय।

दर्द ना जाने कोई,

दर्द ना जाने कोई,

मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई,

मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।

दर्द की मारी वन वन डोलु,

दर्द की मारी वन वन डोलु,

वैद्य मिल्यो ना कोई,

वैद्य मिल्यो ना कोई,

मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।

हिरा री गत जोहारी जाने,

हिरा री गत जोहारी जाने,

जो कोई जोहारी होय,

जो कोई जोहारी होय,

मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।

सूली ऊपर सेज पिया की,

सूली ऊपर सेज पिया की,

ओ सोवनो किन विद होय,

सोवनो किन विद होय,

मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।

घायल की गत घायल जाने,

घायल की गत घायल जाने,

जो कोई घायल होय,

जो कोई घायल होय,

मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।