पापा को पाया तो रब को पाया

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॥ पावन पाठ ॥

पापा को पाया तो,

रब को पाया है,

पापा की छाया में,

दिल का चैन पाया है,

ये कैसा रिश्ता है,

कैसा नाता है,

जन्म जन्म तक,

पापा तेरा साथ माँगा है।।

हर गम उठाया,

तुमने अकेले,

हम तो बस हर दम,

खुशियों में खेले,

सारे संसार का,

मान और सम्मान दूँ,

अपनी खुशियाँ सभी,

तुझ पे ही वार दूँ,

ये मेरा जीवन तो,

तेरा साया है,

तेरी ही छाया में,

दिल का चैन पाया है.....

तुझसे मिला है,

जो कुछ है पाया,

नाज़ो से तुमने,

मुझको है पाला,

संस्कारो से मुझे,

जीना सिखाया,

मेरा दिल ना दुखे,

ये तूने चाहा,

मेरे लिए तुम कितना,

दर्द उठाते हो,

जन्म जन्म तक पापा,

तेरा साथ माँगा है,

पापा कों पाया तों,

रब को पाया है।।

पापा की छाया में,

दिल का चैन पाया है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।