कितना विष पी डाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कितना विष पी डाला,

भोले भाले सरकार,

शीश पे गंगा फिर भी,

तू मांगे जल की धार।।

भूल गया क्या तेरा,

रुतबा है न्यारा,

देवों में सबसे ऊपर,

नाम तुम्हारा,

मांग तेरे भक्तो से,

कोई अच्छा सा उपहार,

शीश पे गंगा फिर भी,

तू मांगे जल की धार।

कितना विष पी डाला......

मीलो तू बाबा हमको,

पैदल चलाए,

छोटी सी लुटिया में,

जल भरवाए,

पाँव में कंकड़ कांटे,

चुभ जाते कई हजार,

शीश पे गंगा फिर भी,

तू मांगे जल की धार।

कितना विष पी डाला....

सावन है तेरा बरसे,

दिन रात पानी,

फिर क्या कमी है तुमको,

जल की ओ दानी,

हमको भी ऐ बाबा,

बतलाओ ना एक बार,

शीश पे गंगा फिर भी,

तू मांगे जल की धार।

कितना विष पी डाला....

‘सोनू’ कहे की गंगा,

जल के बहाने,

पास बुलाता अपने,

प्यार लुटाने,

पतितो को कर देती,

पावन गंगा की धार,

शीश पे गंगा फिर भी,

तू मांगे जल की धार।

कितना विष पी डाला,

भोले भाले सरकार,

शीश पे गंगा फिर भी,

तू मांगे जल की धार।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।