गुरु का सुमिरन कर ले

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॥ पावन पाठ ॥

अपने अंतरमन में,

गुरु का सुमिरन कर ले,

फिर सँवर जाएगी,

ये तेरी जिन्दगी।।

ध्यान चरणों में गुरु के,

लगाते रहो,

सेवा करते रहो,

किरपा पाते रहो,

हर लेंगे अज्ञान तेरा,

प्रकाश ज्ञान की भर देंगे,

फिर सँवर जाएगी,

ये तेरी जिन्दगी।।

चाहो मुक्ति तो सद्गुरु,

बना लीजिए,

गुरु से आज्ञा ले जीवन में,

काम कीजिए,

जन्म-मरण के बंधन से,

छुटकारा दिलवायेंगे,

फिर सँवर जाएगी,

ये तेरी जिन्दगी।।

जाने किस पुण्य से ये,

नर तन मिला,

गुरु की कृपा से उजड़ा,

चमन ये खिला,

“परशुराम”तू सौंप गुरु को,

जीवन की पतवार को,

फिर सँवर जाएगी,

ये तेरी जिन्दगी।।

अपने अंतरमन में,

गुरु का सुमिरन कर ले,

फिर सँवर जाएगी,

ये तेरी जिन्दगी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।