कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर,

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर....

साडी सुनके तू अपनी सुना जाया कर,

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर.....-2

दुख सुख खुशी गम खेडां सब तेरियां,

कर छड दूर सातो दुखा दी हनेरिया,

दुखा दी हनेरिया, दुखा दी हनेरिया...

बेड़ा बच्चेया दा आके बने ला जाया कर,

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर......

दिला दिया गल्लां दोवे बै के कर लवांगे,

इक दूजे दे बिन पल वी ना रवांगे,

पल वी ना रवांगे, पल वी ना रवांगे...

साडी कुटिया च फेरा कदे पा जाया कर

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर....

तेरे बिन दाती साडा पल ना गुजारा ए,

झंडे वालिये नी सानू तेरा ही सहारा ए,

तेरा ही सहारा ए,तेरा ही सहारा ए.....

असां बेसमझ तू आ के समझा जाया कर

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर......

ओ वी तेरा घर ए माँ, ए वी तेरा घर माँ,

मैनु नु वी देदे आके सुखां वाला वर माँ,

सुखां वाला वर माँ, सुखां वाला वर माँ....

इक नजर सव्वली तू घूमा जाया कर

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर......

कदे कदे तू साडे घर आ जाया कर,

साडी सुन के तू अपनी सुना जाया कर.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।