भगतो रे चुनरिया घोटे की हमे माँ को चड़ना

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जय बोलो माँ की सुन्दर सजा के इक झांकी,

नवारते में घर हमारे माँ को आना है,

भगतो रे चुनरिया घोटे की हमे माँ को चड़ना है,

ना जाने शेरसवारी आये अपने अटरिया,

कब से आंखे थकी थकी सी देख रही है दुवरिया,

भगती में डुबो माँ की मन में निहारो जानकी करदे गी रहम नजरिया,

मैया जी के दरस मिले गे खुशियों के सुमन खिले गे,

शारदा मन के भावो की जोत जला है,

भगतो रे चुनरिया गोटे की हमे माँ को चड़ना है,

एक अडिग विश्वास लिए माँ को दर पे भूलते है

लाल चुनरिया घोटे वाली मैया जी को चडाते है,

पुरना गिरी की रानी शिव की सती भवानी अधि शक्ति घर पाते है,

मैया जी का आसन लगाये प्यार से उसपे बिठाये

प्रेम से माँ के चरणों में हमें शीश जुकाना है,

भगतो रे चुनरिया धोटे की हमें माँ को चड़ना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।