मेरी दाती ओ मईया मुझे थाम ले

- श्री सुभाष चन्द्र त्रिवेदी
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी दाती ओ मईया मुझे थाम ले।

कब से बैठा हुआ हूँ मैं तेरे सामने।।

जग का मारा हुआ सबसे हारा हुआ,

भरोसा था वह भी नकारा हुआ,

द्वार कोई ना बाकी रहा सामने,

मेरी दाती ओ मईया मुझे थाम ले.....

तू भी ना सुने तो मैं जाऊ कहा,

थक कर हार कर तो मैं आया यहा,

फिसल कर के खडा हु तेरे सामने,

मेरी दाती ओ मईया मुझे थाम ले.....

जब भी मैं गिरा हूं संभाला है माँ

अपने बेटे से बढ़कर के पाला है माँ

हर कतरा आए माँ तेरे सामने .....

मेरी दाती ओ मईया मुझे थाम ले

जननी ना होकर के भी जननी बनी,

तेरा बेटा बनु ऐसी करनी नही,

नजरे कैसे उठालू तेरे सामने,

मेरी दाती ओ मईया मुझे थाम ले.....

माँ कहकर भी मैंने ना माना तुझे,

फिर भी ना पराया है जाना मुझे,

शर्म से सिर झुका है तेरे सामने,

मेरी दाती ओ मईया मुझे थाम ले.....

रचनाकार :- श्री सुभाष चन्द्र त्रिवेदी

माँ आशापुरा धाम ऑचल भोपावर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।