चलते-चलते तेरे दर पे आगए

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॥ पावन पाठ ॥

चलते-चलते तेरे दर पे आगए,

था मुकदर जिनका दर्शन पा गए

ऐ मेरी तकदीर तुझसे क्या मिला,

रास्ता मिलने पर भी गुमराह गये

कोन सी होगी घडी दीदार की,

हर घडी यु ही बिताए जा रहे

दिल की दिल में रह ना जाये हसरते,

हाल दिल ये सोचकर ही रह गये

दर पे जो आया वो खाली ना गया,

हम भी किस्मत आजमाने आ गये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।