दो बोल प्यार वाले बोल रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दो बोल प्यार वाले बोल रे,

कन्हैया नैनों के द्वार,

अब तो खोल रे,

हमसे है पर्दा है किस बात का,

इतना भी नखरा किस बात का,

नखरा दिखाना तू तो छोड़ रे,

कन्हैया नैनों के द्वार,

अब तो खोल रे,

दो बोल प्यार वाले बोल रे,

कन्हैया नैनों के द्वार,

अब तो खोल रे,

निंदिया ना आएं, मुझको रात को,

दरश करा दो, समझो बात को,

धीरज को मेरे मत ना तौल रे,

कन्हैया नैनों के द्वार,

दो बोल प्यार वाले बोल रे,

कन्हैया नैनों के द्वार,

अब तो खोल रे,

दो बोल प्यार वाले बोल रे,

कन्हैया नैनों के द्वार,

अब तो खोल रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।