हमको भी हर साल तेरे दर आना है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर आये लेके खुशियां हज़ार,

आशाये मन में जगी बेशुमार,

आये तेरे दरबार दर्शन पाना है,

हमको भी हर साल तेरे दर आना है

माँ के दर्शन से मिलता है साचा प्यार और माँ का दुलार,

माँ की महिमा को वो पहचाने मन में जिसके हो भागती और प्यार,

रस्ते रस्ते पर्वत पर्वत हो जाये गुलजार पड़ जाये माँ के कदम एक बार,

दर पे आके माँ तेरे ये सिर को झुकाना है,

हमको भी हर साल तेरे दर ........

माँ के चरणों में शीश नबा कर मैं करू गा माँ का सिंगार,

माँ की भागती में तन मन लगा कर आरती करू बार बार,

तेरे भगतो को मिल जाये तेरा ये दीदार माँ भगतो पे हो जाये तेरा उपकार,

चरणों में एके तेरे ये मन को लगना है,

हमको भी हर साल तेरे दर ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।