झोली ए फकिरां दी भरीं ना भरीं

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झोली ए फकिरां दी भरीं ना भरीं,

माये साडे प्यार उते शक ना करीं.....-3

मेहरां दा हथ सिर धरि ना धरि,

माये साडे प्यार उते शक ना करीं.....

एहो गल असी तां हमेशा कहांंगे,

तेरे हाँ पुजारी माये तेरे रहाँगे,

दुख सन्ताप साडे हरि ना हरि,

माये साडे प्यार उते शक ना करीं....

चरण तेरे फडे सदा फडी रवांगे,

मूरत तेरी दिल दे विच जडी रखाँगे,

बान्ह तू न्मानेया दी फडी ना फडी,

माये साडे प्यार उते शक ना करीं.....

अथरु जो अखियां चो चोई जान्दे ने,

तरियां दहलीज़ा माँ धोई जान्दे ने,

तू ओना हन्जुआं च तरि ना तरि,

माये साडे प्यार उते शक ना करीं....

अर्ज़ियां करोडाँ नीत पढ दी ए तू,

फैसले वी निर्दोष करदी ए तू,

अर्ज़ी ए साडी पढी ना पढी,

माये साडे प्यार उते शक ना करीं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।