नन्दलाल जिह्ना दे वल्ले

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नी नन्दलाल जिह्ना दे वल्ले,

ओहना दी बल्ले बल्ले........-2

नन्दलाल लीला अवतारी,

दुष्टदलन संतन रखवारी।

जिह्ना दे वधा प्रेम दे पल्ले,

ओहना दी बल्ले बल्ले।

नी नन्दलाल जिह्ना दे वल्ले.......

नन्दलाल दे जो ने दीवाने,

मस्ती विच रेह्न्दे मस्ताने।

लगदे ने ओ झल्लम झल्ले,

ओहना दी बल्ले बल्ले।

नी नन्दलाल जिह्ना दे वल्ले.......

नन्दलाल कई रूप बटाके,

टैनं करे भगता घर जाके।

ओ जावे मार मार के हल्ले,

ओहना दी बल्ले बल्ले।

नी नन्दलाल जिह्ना दे वल्ले.......

भगती विच रंगे जो रेह्न्दे,

सहन मुश्किला सी न कहन्दे।

ओ हैगा सबर जिह्ना दे पल्ले,

ओहना दी बल्ले बल्ले।

नी नन्दलाल जिह्ना दे वल्ले.......

मधुपहरि दे बन पुजारी,

नन्दलाल दे बन भिखारी।

सोह्णेया दर जिह्ना ने मल्ले,

ओहना दी बल्ले बल्ले।

नी नन्दलाल जिह्ना दे वल्ले,

ओहना दी बल्ले बल्ले.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।