कीर्तन की रात है बाबा का साथ है

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॥ पावन पाठ ॥

आज ख़ुशी से झूम रहा दिल,

ना जाने क्या बात,

कीर्तन की रात है,

बाबा का साथ है.....-2

भैरुँ जी बाबा का खूब सजा दरबार है,

भैरुँ जी बाबा का खूब सजा दरबार है,

हर कोने में गूँज रही,

मीठी मीठी जयकार हैं,

ऐसा लगता प्रगट हो रही,

ऐसा लगता प्रगट हो रही,

फूलों की बरसात है,

कीर्तन की रात है,

बाबा का साथ है....

जाने कैसा जादू है,

इस बाबा के दरबार में,

झूम झूम के नाँच रहे,

सेवक सारे दरबार में,

किस्मत वालो को ही मिलती,

क़िस्मत वालों को ही मिलती,

दोनो ये सोगात हैं

कीर्तन की रात है,

बाबा का साथ है......

आज ख़ुशी से झूम रहा दिल,

ना जाने क्या बात,

कीर्तन की रात है,

बाबा का साथ है...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।