राजी है हम है जिसमे तेरी रजा है,

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॥ पावन पाठ ॥

सारे जहां के मालिक तेरा असरा है,

राजी है हम है जिसमे तेरी रजा है,

हम क्या बताये तुमको तुझे सब खबर है,

किस्मत बही है जो तेरा फैसला है,

राजी है हम है...........

सजदे में कैसे हम सिर को झुकाए,

मजबुरिया मेरी तू जानता है,

राजी है हम है जिसमे............

खता मुझसे होगी तो सजा भी मिले गी,

मुझे मेरे अंदर से तू देखता है,

राजी है हम है जिसमे...........

तू ही आगाज है तू ही अंजाम मेरा,

तू ही इत्गा है तू ही इन्तहा है,

राजी है हम है जिसमे............

तुझी में तो है एक चलने की शक्ति,

कैसे समज ले कोई की खुद चल रहा है,

राजी है हम है जिसमे तेरी रजा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।