कैसा खेल रचाया

संत कबीर
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कैसा खेल रचाया मेरे दाता, जित देखूं उत तुम ही तुम

कैसी भूल जगत पर डाली, सब करनी कर रहा तू....

नर और नारी में एक तू ही, सारे जगत में दरसे तू,

बालक बन कर रोने लगा है, माता बन कर पुचकारे तू

कैसा खेल रचाया मेरा दाता……

राज घरों में राजा बन बैठा, भिखारियों में मंगता तू,

झगड़ा हो तो झगड़न लागे, फ़ौजदारी में थाणेदार तू

कैसा खेल रचाया मेरे दाता………

देवों में देवता बन बैठा पूजा करन में पुजारी तू,

चोरी करन में चोरता है तू, खोज करन में खोजी तू

कैसा खेल रचाया मेरे दाता……

राम ही करता राम ही भरता, सारा खेल रचाया तू,

कहे कबीर सुने भई साधो उलट-पुलट करै पल में तू

कैसा खेल रचाया मेरे दाता………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।