साईं बाबा की पालकी को कांधा लगाओ

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॥ पावन पाठ ॥

साईं बाबा की पालकी को कांधा लगाओ,

पालकी के सामने बाजे है बजा,

पालकी में बेठे है दुनिया के राजा,

नाचो और गाओ भगतो नाचो और गाओ,

साईं बाबा की पालकी ............

धर्मो की दीवारों को अब तोड़ो रे,

साईं की जय जय कर करते आगे बड़ो रे,

साईं गुण गाओ भगतो साईं गुण गाओ,

साईं बाबा की पालकी ............

चावडी के सामने रंगोली सजी है,

चार चोपाई नवरंग विशी है,

और यह चिलम साईं बाबा कोई पिलाओ,

साईं बाबा की पालकी ...........

साईं जी की पालकी में हीरे जड़े है,

दर्सन की आशा में भगत खड़े है,

आरती गाओ रे भगतो आरती गाओ,

साईं बाबा की पालकी .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।