महलों में रहने वाली

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

अरी ओ महलों में रहने वाली, आज तेरे कहाँ की तैयारी है

आज तेरी कहा की तैयारी है, आज तेरे कहा की तैयारी है

अरी ओ महलों में रहने वाली......

श्री रामचंद्र वर प्रणाए मैं जनक दुलारी हूँ,

अवधपुरी में ब्याही आई मैं सीता रानी हूँ

अरी ओ महलों में रहने वाली......

माता कैकेयी ने वचन लिए, राजा दशरथ की आज्ञा है,

छोटे लक्ष्मण साथ हुए मेरी वनों की तैयारी है

अरी ओ महलों में रहने वाली......

महल छोड़े, चौबारे छोड़े, छोड़ा सारा घर बार,

छूट गए मेरे सास ससुर भी, छोड़ा अयोध्या का राज

अरी ओ महलों में रहने वाली......

हार उतारा, सिंगार उतारा, उतारे सोलह सिंगार,

भगवा बाणा पहन लिया, मैने फूल लिए अपनाए

अरी ओ महलों में रहने वाली......

13 वर्ष बीत चले,14वें मिले हनुमान,

लंका सारी फूंक गिराई, विभीषण मिलाए श्रीराम

अरी ओ महलों में रहने वाली......

कुंभकर्ण मारे, मेघनाद मारे, रावण गए सिधाए,

भक्त विभीषण राज दिया तब की सब ने जयकार

अरी ओ महलों में रहने वाली......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।